मै कभी कुछ सोच लेता हूं।

मै कभी कुछ सोच लेता हूं, सोचते सोचते ना जाने कब नींद की चादर ओढ़ लेता हूं, मेरे सपने मेरी सोच से ज्यादा धुंधले है, उन पर विश्वास ना करना, मैं अभी वाहा था, मझधार में किनारा देखा तो सोचा, रुख मोड़ लेता हूं। वो बचपन था, जब आँख झपकी थी, आंखे खोली तो, आइने…

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कुछ अलग था…

एक उम्र लग गयी उन्हें पाने में, वो मिले भी, और बिछड़ भी गये, लेकिन, इंतेज़ार करने का मज़ा अलग ही था, जब हम घंटो उन्ही के बारे में सोचते थे, प्यार था वो केवल एक तरफा ही, लेकिन उस प्यार का  मज़ा सच बताये तो, अलग ही था, उनकी गलियो के चक्कर लगाकर शाम…

वो…

वो एक हवा के झोंके की तरह गुज़र गई तो क्या? मैं बनकर पंखा, उसका  रुख बदल दुगा। अगर वो नदी भी बनकर, सरसराती निकल गई तो क्या? मैं दरिया बनकर, उसको खुद में सामा लूंगा। गर वो बन भी जाए विशाल हिमालय की तरह, तब भी मैं बर्फ की तरह, खुद को उस पर…

कलम भी था, और किरदार भी, फिर भी ना जाने क्यों, हमारी कहानी काश बनकर कर रह गयी।।।।

पिर…..

 कितने दिनों से मैं सोया नही हूँ, पर क्यों नही? नींद आती तो है हर रोज़, पर चहेरे की चोखट से वापस लौट जाती है, आँखों तक पौछति नही! शायद मेरी किसी बात पर नाराज़ है, मैंने समझना चाहा भी उसको बहुत की यह रूठना, मानना मेरे बस का रोग नही, थोड़ा कमज़ोर हु…

Main Kya hu…

Mein kya hu, Mein kya nhi hu, Yaha hokar bhi, shayad Yaha mein nhi hu, Agar mujhe jaante ho Toh batao, Woh kya hai Jo mein nhi hu, Aankh hu, Sapna nhi hu, Dimaag hu, soch nhi hu, Pankh hu, udaan nhi hu, Mein har tum mein hu, par Mein khud mein hi nhi hu,…