अनंत हैं तू……

तू बढ़ चल आजअनंत राह पर,उच्चाई हैं, अनंततेरे लिए।बना अनंत सीमापरिश्रम की, मिलेगीअनंत सफलताएँ तुझे।आए अनंत मुसीबतेंचाहें,चाहें हो, अनंतहार,बढ़ाते रहनाकदम तू, होगीजीत हर बार।पिले अनंत घूटपरिश्रम के,अनंत है मौके,तेरे लिए।न गिर यूँ,बीच मैंदा में,लड़ने है, अनंतयुद्ध तुझे।देख सूरज को,अनंत हैं प्रकाशउसमें।तू भी बन,सकता है सूरज,शक्तियां हैं,अनंत तुझमें।"अनंत नहीं तेरीज़िन्दगी तोक्या हुआ?अनंत है तेरेख्वाब।निकल पढ़, इसभीड़ [...]

दीवानी….

बादलों का ओढ़ आँचल,खामोश वो जा रही है,देख न ले कोई उसे,दुनिया से नज़रे बचा रही है,एक नदी सी वो ,देखोसागर की तलाश मेंजा रही है।उलझी हुई, प्रेम जाल में,पिया से मिलने को, छटपटा रही है,छिपाये दिल अपना, आजराधा फिर कृष्ण की होनेजा रही है।झुकाए लाज से भारी पलकें,मगन वो राग प्रेमगा रही है,मद्धम सी [...]

एक अधूरी कविता….

यह वक़्त.... मुझे ख़ास है। इसमें बस मैं, मेरा कलम, और एक किताब है।  इस किताब के दूसरे  पन्ने पर, एक कविता है। शायद, एक अधूरी कविता। कविता मे, कुछ छंद टूटे हुए है,  कुछ शब्द छूटे हुए है। जैसे किसी टूटी हुई माला के बिखरे हुए मोती हो। लेकिन, इतनी विकारता  होने पर भी [...]

मै कभी कुछ सोच लेता हूं।

मै कभी कुछ सोच लेता हूं, सोचते सोचते ना जाने कब नींद की चादर ओढ़ लेता हूं, मेरे सपने मेरी सोच से ज्यादा धुंधले है, उन पर विश्वास ना करना। मैं अभी वाहा था, मझधार में किनारा देखा तो सोचा, रुख मोड़ लेता हूं। वो बचपन था, जब आँख झपकी थी, आंखे खोली तो, आइने [...]

कुछ अलग था…

एक उम्र लग गई उन्हें पाने में, वो मिले भी,और बिछड़ भी गए, लेकिन,इंतेज़ार करने का मज़ा अलग ही था। जब हम घंटो उन्हीं के बारे में सोचते थे,प्यार था वो केवल एक तरफा ही,लेकिन उस प्यार का मज़ा सच बताये तो, अलग ही था। उनकी गलियों के चक्कर लगाकर शाम कट ती थी,और सुबह [...]

वो…

वो एक हवा के झोंके की तरह गुज़र गई तो क्या? मैं बनकर पँखा, उसका  रुख बदल दूंगा। अगर वो नदी भी बनकर, सरसराती निकल गई तो क्या? मैं दरिया बनकर, उसको खुद में समा लूँगा। गर वो बन भी जाए विशाल हिमालय की तरह, तब भी मैं बर्फ की तरह, खुद को उस पर [...]